लखनऊ विधानसभा के बाहर कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन, सरकार पर जनविरोधी नीतियों का आरोप


 

लखनऊ विधानसभा के बाहर कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन, सरकार पर जनविरोधी नीतियों का आरोप

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में बुधवार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस का यह प्रदर्शन प्रदेश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, मनरेगा मजदूरों की समस्याओं और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के विरोध में किया गया। बड़ी संख्या में जुटे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें उठाईं।कांग्रेस ने पहले ही विधानसभा घेराव का ऐलान किया था, जिसके चलते प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। विधानसभा के आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा और कई मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई। इसके बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता विभिन्न जिलों से लखनऊ पहुँचे और विधानसभा के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठ गए।धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार जनता की बुनियादी समस्याओं से मुंह मोड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, पेट्रोल-डीजल, गैस और जरूरी सामान आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। इसके साथ ही बेरोजगारी भी गंभीर मुद्दा बन चुकी है और पढ़े-लिखे युवा नौकरी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मजदूरों को समय पर काम और भुगतान नहीं मिल रहा है। कई जिलों में मजदूर महीनों से मजदूरी के इंतजार में हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार मजदूरों और किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। किसानों को न तो उनकी फसलों का उचित मूल्य मिल रहा है और न ही कर्ज से राहत।प्रदर्शन के दौरान कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा रोके जाने और कुछ जगहों पर नजरबंद किए जाने की भी खबर सामने आई। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।धरने के बाद कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में महंगाई पर नियंत्रण, बेरोजगार युवाओं को रोजगार, मनरेगा मजदूरों को पूरा काम और भुगतान, किसानों को न्याय तथा कानून-व्यवस्था सुधारने की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द ही इन मांगों पर कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह धरना-प्रदर्शन आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति को और गर्म कर सकता है। कांग्रेस इस आंदोलन के जरिए खुद को जनता के मुद्दों से जुड़ी पार्टी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। राजधानी लखनऊ में हुए इस प्रदर्शन को विपक्ष की सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।

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