महाकुंभ में हजारों साल पुरानी कलाकृतियों का डिजिटल प्रदर्शन

 

 महाकुंभ में हजारों साल पुरानी कलाकृतियों का डिजिटल प्रदर्शन

संजय सक्सेना,लखनऊ

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम के किनारे  13 जनवरी से महाकुंभ का आगाज हो जायेगा जो 26 जून तक देश-दुनिया के लोगों और भक्तों की उत्सुकता एव आस्था का केन्द्र बना रहेगा। करीब चालीस करोड़ सनातन प्रेमियों के यहां आस्था की डुबकी लगाने जाने की उम्मीद है।महाकुंभ में न केवल धार्मिक अनुष्ठान, बल्कि सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों का भी अनूठा संगम देखने को मिलेगा। प्रदेश सरकार ने महाकुंभ को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, ताकि आम श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का अनुभव एक नई तकनीकी दृष्टि से हो सके। यूपी के संस्कृति विभाग के तहत पुरातात्विक महत्व के स्थलों, मूर्तियों और कलाकृतियों का थ्रीडी होलाग्राफिक मॉडल, वर्चुअल रियलिटी (वीआर), और ऑग्मेंटेड रियलिटी (एआर) तकनीकों के माध्यम से प्रदर्शन किया जाएगा।

इन प्रदर्शनों में दो-ढाई हजार साल पुरानी कलाकृतियां भी शामिल हैं, जिनमें जैन तीर्थंकर, बुद्ध, गज लक्ष्मी, दुर्गा, यमुना, सरस्वती, और सूर्य की प्रतिमाएं प्रमुख हैं। मथुरा, झांसी और लखनऊ राज्य संग्रहालयों से संग्रहित इन   कलाकृतियों को महाकुंभ के पांडाल में प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे दर्शक इन्हें एकदम वास्तविक रूप में देख सकेंगे।इसके अलावा, प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों जैसे कुसुमवन सरोवर (गोवर्धन, मथुरा), कर्मदेश्वर महादेव मंदिर (वाराणसी), और कई अन्य स्थल भी थ्रीडी स्कैनिंग के माध्यम से प्रदर्शित किए जाएंगे। इन स्थलों को एआर-वीआर तकनीक से प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे लोग इनकी सांस्कृतिक महत्ता और इतिहास को एक नए नजरिए से समझ सकेंगे। कुल मिलाकर, महाकुंभ के इस डिजिटल रूपांतरण से न केवल श्रद्धालुओं को समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव मिलेगा, बल्कि वे प्राचीन धरोहरों को 360 डिग्री व्यू में देख सकेंगे। साथ ही, गंगा की उत्पत्ति, समुद्र मंथन जैसी ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित लघु फिल्में भी डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत की जाएंगी। इसके साथ-साथ एआई मित्र रोबोट गाइड भी श्रद्धालुओं को जानकारी प्रदान करेगा, जिससे महाकुंभ का अनुभव और भी सुविधाजनक और इंटरएक्टिव हो सकेगा। संस्कृति विभाग की इस पहल से प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों और कलाकृतियों का महत्व वैश्विक स्तर पर बढ़ेगा, और यह महाकुंभ डिजिटल कुम्भ के रूप में एक ऐतिहासिक घटना बनेगा।

Post a Comment

0 Comments