आसिम मुनीर को साइड लाइन करने की तैयारी! इमरान खान को शहबाज सरकार ने दिया ये नया ऑफर


 

आसिम मुनीर को साइड लाइन करने की तैयारी! इमरान खान को शहबाज सरकार ने दिया ये नया ऑफर

पाकिस्तान में सेना को कमजोर करने के लिए शहबाज शरीफ की सरकार इमरान खान के साथ हाथ मिलाने को तैयार है. सोमवार (23 फरवरी) को प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने बीच सदन में इसको लेकर पीटीआई नेताओं को ऑफर दिया. सनाउल्लाह ने कहा कि आप लोग आगे आइए, हम साथ मिलकर काम करेंगे. हम सभी मिलकर लोकतंत्र चार्टर 2006 पर हस्ताक्षर करते हैं और पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति को सुधारने का काम करते हैं. शहबाज शरीफ सरकार की तरफ से पहली बार इस तरह का ऑफर खुलकर दिया गया है. सनाउल्लाह को शरीफ परिवार का करीबी नेता माना जाता है.डॉन अखबार के मुताबिक विपक्ष के नेता ने इमरान खान को रिहा करने का एक प्रस्ताव दिया. इस पर सनाउल्लाह ने कहा- बात अच्छे से कीजिए. आगे आइए और लोकतंत्र चार्टर 2006 पर साइन कीजिए. सनाउल्लाह के इस ऐलान से संसद में हलचल तेज हो गई.

क्या है पाकिस्तान का लोकतंत्र चार्टर 2006?

2006 में सेना को कमजोर करने के इरादे से नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो ने मिलकर लोकतंत्र चार्टर तैयार किया था. पाकिस्तान में इसे लोकतंत्र चार्टर 2006 के नाम से जाना जाता है. लंदन में उस वक्त नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो ने उस पर हस्ताक्षर भी किए थे.इस चार्टर के मुताबिक सेना का राजनीति से दूर रखना था. सेना पाकिस्तान की सियासत में हस्तक्षेप न कर पाए, इसके उपाय इसमें बताए गए थे. इसके अलावा प्रधानमंत्री पद को मजबूत करने का भी इसमें प्रस्ताव था. वहीं इस चार्टर में फ्री एंड फेयर चुनाव कराने की घोषणा की गई थी.हालांकि, बदली परिस्थितियों में यह चार्टर अभी इस्लामाबाद में धूल फांक रहा है. पाकिस्तान की सियासत में सेना पहले से भी ज्यादा मजबूत हो गई है. आसिम मुनीर पहले ऐसे सेना प्रमुख हैं, जिन्हें आजीवन सुरक्षा मिली है.

आसिम मुनीर पर नकेल कसने की तैयाारी?

शहबाज शरीफ की सरकार ने इमरान खान को यह प्रस्ताव ऐसे वक्त में दिया है, जब सेना और इमरान खान के बीच किसी संभावित डील की चर्चा है. पाकिस्तान के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि सेना प्रमुख इमरान खान से डील कर सकते हैं. इसके लिए मुनीर ने अपने करीबी मोहसिन नकवी को बातचीत के लिए उतारा है.ऐसे में अब शहबाज सरकार सीधे इमरान खान की पार्टी को ऑफर दे रहे हैं. हालांकि, न तो इमरान खान की पार्टी ने इस पर कोई टिप्पणी की है और न ही सेना की ओर से इस पर कुछ आया है.


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